समय के साथ बॉलीवुड मूवी में सेक्स के फिल्मांकन में बदलाव

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Photo Credit : Youtube

बॉलीवुड के बीते वर्षों से कई बदलाव आये है ,पहले फिल्मे केवल अर्थ और संदेश के के लिए बनाये जाते थे तो अब फिल्मे मनोरंजन और मस्ती के लिए बनायीं जाने लगी है । मामूली दृश्यों से बोल्ड और कामुक दृश्यों से सेक्सी दृश्यों से भरी फिल्मो के सफर में बॉलीवुड ने एक लंबा रास्ता तय किया है।

बॉलीवुड को ‘समाज का प्रतिबिंब’ कहा जाता है। बॉलीवुड के फिल्मे आम तौर पर उन चीजों और परिस्थितियों को दिखाती है जो समाज में इस समय में चल रहे होते है। जैसे-जैसे समाज और टारगेट ऑडियंस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, फिल्मों भी उसी तर्ज़ पर बनाये जाने लगी है।

साल 1929

फिल्म में ‘ए थ्रो ऑफ डाइस‘, जो एक मूक फिम थी , में सीता देवी और चारू राय ने बहुत ही इंटिमेट चुंबन दृश्य दिया था।

साल 1932

Actress Zubeida Kissing Scene in Zarina
Photo Credit: toyaps.com

ज़रीना‘ फिल्म में,अभिनेत्री ज़ुबेदा एक छोटी पोशाक पहनी थी और मुख्य अभिनेता के साथ एक चुंबन भी साझा की थी।

साल 1933

1933 में आयी कर्मा मूवी में देविका रानी ने फिल्म के एक्टर हिमांशु रॉय को 4 मिनट तक लिप लॉक किया।

साल 1952

देश की स्वतंत्रता अपने साथ सेंसर बोर्ड का सिकंजा भी अपने साथ ले कर आया और 1952 के Cinematograph Act के तहत फिल्मो से किसिंग सीन्स को पूरी तरह से बैन कर दिया और किसिंग सीन को परदे पर दिखलाने के लिए कभी फूलो का तो कभी तितलियों का सहारा लिया जाता था। और सेक्स सीन को दर्शाने के लिए कभी जलती हुई आग तो कभी हीरो हेरोइन के टांगो को चादर के बाहर पैरो के रगड़ के द्वारा दर्शाया जाता था।

साल 1960 और साल 1970

60 और 70 का दशक ज़ीनत अमान , सिम्मी ग्रेवाल ,परवीन बॉबी , डिंपल कपाडिया और शर्मीला टैगोर जैसी सेक्सी और खूबसूरत एक्ट्रेस दौर था और इन लोगो ने बॉलीवुड सेक्सुअलिटी का रूप-रंग ही बदल दिया। सत्यम शिवम् सुंदरम , बॉबी , मेरा नाम जोकर जैसी फिल्मो ने सेक्स की पाबंदी को तोड़ा बल्कि साथ ही साथ सेक्सुअलिटी और सेंसुअलिटी को नया आयाम भी दिया।

साल 1980

राज कपूर ने राम तेरी गंगा मैली में मन्दाकिनी के वक्षस्थल (बूब्स) को भी इतनी अच्छे से दर्शाया कि सेंसर बोर्ड ने भी उसे बड़े आराम से उसे पास कर दिया गया और सुहाग रात के सीन्स अब एक्टर एक्ट्रेस आराम से करने लगे। 1981 में आयी इन्साफ के तराज़ू में पद्मिनी कोल्हापुरे और ज़ीनत अमान पर दर्शाया रेप सीन 80 के दशक के हिसाब से बहुत आगे के दौर का था। उत्सव मूवी में रेखा और शेखर सुमन के बीच का इंटिमेट सीन उस समय हरेक इंसान के जुबान पर था।

साल 1990

90 का दशक बोल्ड फिल्मो का दशक था। यह प्रयोग और सीमाओं के आगे फिल्म बनाने एक समय था और इस दशक में सेंसर बोर्ड थोड़ा अधिक उदार बन गया था। कामसूत्र: ए टेल ऑफ़ लव , बैंडिट क्वीन, फायर, वाटर ने नए तरीके सेक्सुअलिटी को परिभाषित किया। फायर में पहली बार लेस्बियन सेक्स पर मूवी बनी तो कामसूत्र में पुरुष-महिला के शारीरक जरुरत को दर्शाया गया तो बैंडिट क्वीन में रियल ज़िन्दगी की नग्नता को बहुत अच्छे तरीके से दर्शाया गया। माया मेमसाब में पहली बार शाहरुख़ खान और दीपा मेहता के बोल्ड सेक्स सीन जिसे फिल्माने के लिए कहते है कि दोनों ने बंद होटल के कमरे में सीन का रिहर्सल किया।

साल 2000

अब फिल्मों के वर्तमान युग में बहुत कुछ बदल गया है और इसमें कोई सीमा नहीं रह गई है। इंटिमेट बोद सेक्स सीन्स , सेक्स कॉमेडी , किसिंग सीन, प्रीमैरिटल सेक्स , यह सब बहुत सामान्य हो चूका है और शायद हम सब भी इन चीज़ो को देखने की आदत पड़ चुकी है।