जानिए 7 दिन पहले ही क्या बताता है यह मंदिर!!!

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temple indicate about rain before seven days
Photo Credit : kanpurnagar.nic.in

कुछ राज्यों में आज भी किसान सूखे की मार झेल रहे हैं व वे हमेशा इसी असमन्जस में रहते हैं की जाने कब बारिश होगी और कब नहीं जिस वजह से वे अपनी फसल की उचित ढंग से तैयारी भी नहीं कर पाते व अंत में न ही उचित रूप से लाभ कमा पाते हैं।

वे बस मौसम विभाग की जानकारी के आधार पर ही अपनी फसल की तैयारी कर पाते है जहाँ कभी कभी मौसम विभाग द्वारा की गई भविष्यवाणी भी गलत साबित होती है और किसानो की तैयारी भी बेकार हो जाती है।

ऐसे में यदि कोई इन किसानो को बरसात की सही जानकारी दे तो कैसा हो। जी हाँ उत्तर प्रदेश में एक मंदिर है जो अपने इस चमत्कार के लिए काफी ख्याति पा चूका है।यह मंदिर कई वर्षों से बरसात की एक दम सही जानकारी किसानो को देकर उनकी मदद कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में भगवन जगन्नाथ का मंदिर है जो वर्षा से ठीक 7 दिन पहले ही आने वाली बारिश के स्वरुप की झलक किसानो को कई वर्षो से दिखा रहा है जिसके रहते किसानो को अपनी फसल के मुताबिक सही व् उचित तैयारी करने का अवसर मिल जाता है ।

दरअसल बात यह है की इस मंदिर की छत बारिश आने से ठीक सात दिन पहले टपकने लगती है व् ताज़्ज़ुब की बात यह यह की छत से टपकती बूँदे बिल्कुल बारिश के सकरूप को दर्शाती है । छत से बूँदें बारिश के जैसे ही टपकती है और बूँदे भी ऐसी ही होती है जैसी बारिश होने वाली होती है।

बहुत से सर्वेक्षणों के बाद भी पुरातत्व वैज्ञानिक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं की इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था व् वे केवल यही ज्ञात कर पाए है की इस मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। इससे पहले इस अनोखे मंदिर के पहले कितने जीर्णोद्धार हुए है वे नहीं जान पाए व् इस मंदिर का निर्माण किसने किया था यह भी आज तक एक अबूझ पहेली ही बना हुआ है।

यह अनोखा मंदिर बारिश की सही भविष्यवाणी कर किसानो की मदद कर रहा है जिस से किसानो को अपनी फसल के लिए निर्णय लेने में बहुत आसानी हो जाती है।

यह मंदिर जनपद के भीतरगाँव विकासखंड मुख्यालय से 3 किलोमीटर पर बेंहटा गाँव में स्थित है।इस मंदिर में काले चिकने पत्थर की भगवान् जगन्नाथ, बलदाऊ व बहन सुभद्रा की मूर्तियाँ स्थापित हैं। इनके साथ मंदिर में सूर्य व् भगवान् पदमनाभम की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।मंदिर की दीवारें लगभग 14 फ़ीट मोटी हैं।

यहाँ मंदिर से वैसी ही रथ यात्रा निकलती है जैसे की पूरी जगन्नाथ मंदिर से निकलती है।फिलहाल यह जगन्नाथ का मंदिर पुरातत्व के आधीन है।

मौसमी बारिश के एक सप्ताह पूर्व इस मंदिर के गर्भ गृह में मानसूनी पत्थर से ठीक उसी आकर व् घनत्वाकार की बूँदे टपकने लगती है जैसी बारिश 7 दिन बाद आने वाली है।आश्चर्य की बात यह है की जैसे ही इस क्षेत्र में वर्षा आरम्भ होती है पत्थर सूख जाता है।

मंदिर के पुजारी दिनेश शुक्ल के अनुसार पुरातत्व वैज्ञानिकों व् आईआईटी वैज्ञानिकों ने जांच की लेकिन वे ना तो मंदिर के निर्माण का सही समय बता पाए ना ही यह पता लगा पाए की बारिश से ठीक 7 दिन पहले पानी टपकने का राज़ क्या है।

मंदिर का आकर बौद्ध मठ के जैसा होने से कुछ लोगो का मानना है की इसे महान अशोक ने बनवाया था वहीँ बहार मोर के निशान व् चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के समय इसका निर्माण किया गया होगा ऐसा भी अंदाज़ा लगया जाता है।

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